तेरी सांसो में मुझको पनाह मिल जाए,
होश खो चुका हूँ कुछ तो सुकून मिल जाए।
अश्क बिखरते हैं मेरी इन निगाहों से हर सू
कुछ घड़ी को तो ये ठहर जाए।
मेरी तमन्ना मैं तेरे काबिल ना सही,
पर ये बता क्यों मेरी ख्वाहिशो की उमर घाट जाए।
मैंने जाना है तेरी हर दस्तक को,
क्योंकर भला यादों का सिलसिला रुक जाए।
एक तमाशा है हर आशिक ऐ “राज” यू ही सही,
फ़िर भी क्यों वो करम से बदतर सजा पाए॥
Dated: २८-जून-२००८
