मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ…..

किताब

Posted by: Desh Raj Sirswal on: June 24, 2008

  

कोई हमारे हाथ मे ऐसी किताब दे,
उलझे हुए सवाल का जो सीधा जबाव दे।

झुलस चुके हैं हालत-ऐ-गर्दिशों से,
एक पल ठहराव का जो आशियाँ दे दे।

मैं तो चला था अकेला अपने को समझ,
इस राह मे भटके हजारों इन्सान मिले।

जिन्दगी गुजर दी सिर्फ़ इस उम्मीद में,
कुछ पल खुशी के कभी हम भी तो जियें।

ऐसी इबादत के साये में हम सब चले,
टूटे हुए दिलों को जो फ़िर से जोड़ दे।

हिम्मत और सब्र वह रास्ता है ‘राज’,
मकसद-ऐ-जिन्दगी को जो सही-सही बयाँ दे॥

Dated:24-05-2006

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  • महेन: सबकुछ उसके नाम लिख दिया क्या? क्या रंग बिखेरे हैं आपने रोम

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