Posted by: Desh Raj Sirswal on: June 27, 2008
मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ,
उन सारी अनकही चाहतों को,
उन सभी अधूरे लम्हों को,
न पूरे हो सके जो कभी।
मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ,
उन सभी सपनों को,
जिन्होंने जन्म पाया तुम्हारे साथ से।
मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ,
मन की उन गहरियों को,
तह न पा सका मैं जिनकी स्वयं कभी।
मैं तम्हारे नाम लिखता हूँ ,
हर पल जागती,
हर पल रोटी,
उन भावनाओं को,
जिन्हें अपने शब्द न दे सका कभी ।
मैं तुम्हारे नाम लिखता हूँ…….
Dated:२६-०६-2008
June 27, 2008 at 10:02 pm
सबकुछ उसके नाम लिख दिया क्या? क्या रंग बिखेरे हैं आपने रोमांटिसिज़्म के। बहुत खूब।
शुभम।